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  • mahurgeeta - Geeta Mahur @mahurgeeta 3 hours ago
  • #राधास्वामीपंथकीसच्चाई
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#moksha #bhakti #Satnam #satsang #hookah #bhajan #sewa #gurbani #parshad
#gurugranthsahib #waheguruji #waheguru
Radhasoami panth Exposed⚡

कबीर, झूठे गुरुवा बात बिगाड़ी, काल जाल नहीं जान्या!
राधस्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी का कोई गुरु नहीं था, वे निगुरे थे। बिना गुरु उन्होंने शास्त्रविरूद्ध भक्ति साधना की तथा राधास्वामी पंथ की स्थापना करके कोरा शास्त्रविरूद्ध अज्ञान जनता में प्रचारित किया। बिना गुरु धारण किए शास्त्रविरूद्ध भक्ति करने के कारण शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत भूत योनि को प्राप्त हुए और अपनी प्रिय शिष्या बुक्की में प्रेतवश प्रवेश करके पहले की तरह ही हुक्का और चूरमा खाने पीने लगे। शिवदयाल जी जीवित अवस्था में हुक्का पिया करते थे उनकी जीवनी में लिखा है जबकि कबीर साहेब की वाणी है... "अमल आहारी आत्मा कबहुं न उतरे पार"
उपरोक्त प्रमाण राधास्वामी पुस्तकों (संतमत प्रकाश, सारवचन वार्तिक, जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज) में वर्णित है। नकली गुरुओं की पहचान होती है वह शास्त्र विरुद्ध साधना करते और करवाते है। जिस कारण वे स्वयं भी भूत योनि को प्राप्त होते है और अनुयायियों को भी नरक व चौरासी का भागी बनाते है। यही दशा राधास्वामी प्रमुख शिवदयाल जी की हुई।
परमेश्वर कबीर साहिब की वाणी है।
"सतगुरु पुरुष कबीर है, चारों युग प्रवाण।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।" परमेश्वर कबीर साहिब की वाणी में प्रमाण है कि बिना सतगुरु के भक्ति करने पर अनमोल मानव जीवन बर्बाद होता है और चौरासी का भागी बनता है। शिवदयाल जी ने भी कोई गुरु धारण नहीं किया था।
गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, चाहे पूछो वेद पुराण।।
गुरु बिन काहु न पाया ज्ञाना, ज्यो थोथा भुस छडे किसाना।
गुरु बिन मिले मोहे ना पावै, जन्म जन्म बहु धक्के खावै।
गुरु बिन प्रेत जन्म सब पावै, वर्ष सहस्र गर्भ सो रहावै। पूर्ण संत की सत्संग सुनने के लिए अवश्य देखें प्रतिदिन-
साधना चैनल 7:30pm से
ईश्वर टीवी 8:30pm से

Visit us- jagatgururampalji.org #राधास्वामीपंथकीसच्चाई #saintrampalji #radhasoamiji #rssb #radhasoami #moksha #bhakti #satnam #satsang #hookah #bhajan #sewa #gurbani #parshad #gurugranthsahib #waheguruji #waheguru Radhasoami panth Exposed⚡ कबीर, झूठे गुरुवा बात बिगाड़ी, काल जाल नहीं जान्या! राधस्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी का कोई गुरु नहीं था, वे निगुरे थे। बिना गुरु उन्होंने शास्त्रविरूद्ध भक्ति साधना की तथा राधास्वामी पंथ की स्थापना करके कोरा शास्त्रविरूद्ध अज्ञान जनता में प्रचारित किया। बिना गुरु धारण किए शास्त्रविरूद्ध भक्ति करने के कारण शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत भूत योनि को प्राप्त हुए और अपनी प्रिय शिष्या बुक्की में प्रेतवश प्रवेश करके पहले की तरह ही हुक्का और चूरमा खाने पीने लगे। शिवदयाल जी जीवित अवस्था में हुक्का पिया करते थे उनकी जीवनी में लिखा है जबकि कबीर साहेब की वाणी है... "अमल आहारी आत्मा कबहुं न उतरे पार" उपरोक्त प्रमाण राधास्वामी पुस्तकों (संतमत प्रकाश, सारवचन वार्तिक, जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज) में वर्णित है। नकली गुरुओं की पहचान होती है वह शास्त्र विरुद्ध साधना करते और करवाते है। जिस कारण वे स्वयं भी भूत योनि को प्राप्त होते है और अनुयायियों को भी नरक व चौरासी का भागी बनाते है। यही दशा राधास्वामी प्रमुख शिवदयाल जी की हुई। परमेश्वर कबीर साहिब की वाणी है। "सतगुरु पुरुष कबीर है, चारों युग प्रवाण। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।" परमेश्वर कबीर साहिब की वाणी में प्रमाण है कि बिना सतगुरु के भक्ति करने पर अनमोल मानव जीवन बर्बाद होता है और चौरासी का भागी बनता है। शिवदयाल जी ने भी कोई गुरु धारण नहीं किया था। गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, चाहे पूछो वेद पुराण।। गुरु बिन काहु न पाया ज्ञाना, ज्यो थोथा भुस छडे किसाना। गुरु बिन मिले मोहे ना पावै, जन्म जन्म बहु धक्के खावै। गुरु बिन प्रेत जन्म सब पावै, वर्ष सहस्र गर्भ सो रहावै। पूर्ण संत की सत्संग सुनने के लिए अवश्य देखें प्रतिदिन- साधना चैनल 7:30pm से ईश्वर टीवी 8:30pm से Visit us- jagatgururampalji.org
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  • mahurgeeta - Geeta Mahur @mahurgeeta 3 hours ago
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#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा

श्री शिव दयाल सिंह जी (1861 - 1878) राधास्वामी मत की शिक्षाओं को प्रारंभ करने वाले पहले गुरु थे।
लेकिन इन्होने कोई गुरु धारण नहीं किआ था।
जबकि शास्त्रों में साफ वर्णित है की बिना सतगुरु बनाये किसी की भक्ति सफल नहीं हो सकती।
कबीर जी की वाणी है "कबीर, गुरू बिन ज्ञान ना उपजै, गुरू बिन मिले ना मोक्ष।
गुरू बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष।।" "कबीर, गुरु की आज्ञा आवहि, गुरु की आज्ञा जाय।
कहे कबीर सो संत है आवागमन नशाये।।" पूर्ण सतगुरु ना मिलने से राधास्वामी पंथ प्रवर्तक शिवदयाल जी ने मनमानी साधना की, राधास्वामी पंथ की पुस्तक-जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज में लिखा है कि
श्री शिवदयाल जी ने 17 वर्ष तक बन्द कमरें में हठ योग किया। 5 वर्ष की आयु से शब्द योग के अभ्यास किआ।
जबकी गीता अध्याय 3, श्लोक 6 से 9 तक हठयोग निषेध बताया है। सिद्ध होता है कि शिवदयाल जी शास्त्रविरूद्ध साधना करते थे, उन्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं था।
गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार जो भी व्यक्ति शास्त्रविधि को त्याग कर मनमाना आचरण करता है उस प्राणी की कभी गती नहीं हो सकती। जिसके परिणाम वश राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत भूत योनी को प्राप्त हुए, वे अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरों व भूतों की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा उसके अन्तिम स्वांस तक प्रवेश रहे।
सोचीये जिस पंथ का प्रर्वतक ही भूत योनी को प्राप्त हुआ हो, और हुक्का पिता हो, तो उनके अनुयाइयों का क्या बनेगा? कबीर साहेब जी की वाणी है।
सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार।
एक चिलम हुक्का भरै, वह डूबै काली धार।।” राधास्वामी पंथ में काल के 5 नाम/मंत्र दिए जाते है, जिनका हमारे सद्ग्रंथो में कोई साक्ष्य नहीं है। कबीर जी की वाणी है कि -
सोई गुरु पूरा कहावै, दोय अख्खर का भेद बतावै। कबीर परमेश्वर की ये उपरोक्त वाणी और गीता जी अध्याय 17 के श्लोक 23 के अनुसार तीन बार में नाम दीक्षा देने का प्रमाण है। इससे सिद्ध होता है की इस पंथ के पास यथार्थ शास्त्रानुसार ज्ञान नहीं है। राधास्वामी पंथ की पुस्तक संतमत प्रकाश के पहले भाग पृष्ठ 17 पर लिखा है कि ‘‘वह सतलोक है, उसी को सतनाम कहा जाता है।
इनको सतनाम व् सतलोक का भी कोई ज्ञान नही है की यह क्या चीज़ है। #राधास्वामीपंथकीसच्चाई #saintrampalji #radhasoamiji #rssb #radhasoami #moksha #bhakti #satnam #satsang #hookah #bhajan #sewa #gurbani #parshad #gurugranthsahib #waheguruji #waheguru #राधास्वामीपंथ_का_खुलासा श्री शिव दयाल सिंह जी (1861 - 1878) राधास्वामी मत की शिक्षाओं को प्रारंभ करने वाले पहले गुरु थे। लेकिन इन्होने कोई गुरु धारण नहीं किआ था। जबकि शास्त्रों में साफ वर्णित है की बिना सतगुरु बनाये किसी की भक्ति सफल नहीं हो सकती। कबीर जी की वाणी है "कबीर, गुरू बिन ज्ञान ना उपजै, गुरू बिन मिले ना मोक्ष। गुरू बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष।।" "कबीर, गुरु की आज्ञा आवहि, गुरु की आज्ञा जाय। कहे कबीर सो संत है आवागमन नशाये।।" पूर्ण सतगुरु ना मिलने से राधास्वामी पंथ प्रवर्तक शिवदयाल जी ने मनमानी साधना की, राधास्वामी पंथ की पुस्तक-जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज में लिखा है कि श्री शिवदयाल जी ने 17 वर्ष तक बन्द कमरें में हठ योग किया। 5 वर्ष की आयु से शब्द योग के अभ्यास किआ। जबकी गीता अध्याय 3, श्लोक 6 से 9 तक हठयोग निषेध बताया है। सिद्ध होता है कि शिवदयाल जी शास्त्रविरूद्ध साधना करते थे, उन्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं था। गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार जो भी व्यक्ति शास्त्रविधि को त्याग कर मनमाना आचरण करता है उस प्राणी की कभी गती नहीं हो सकती। जिसके परिणाम वश राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत भूत योनी को प्राप्त हुए, वे अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरों व भूतों की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा उसके अन्तिम स्वांस तक प्रवेश रहे। सोचीये जिस पंथ का प्रर्वतक ही भूत योनी को प्राप्त हुआ हो, और हुक्का पिता हो, तो उनके अनुयाइयों का क्या बनेगा? कबीर साहेब जी की वाणी है। सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार। एक चिलम हुक्का भरै, वह डूबै काली धार।।” राधास्वामी पंथ में काल के 5 नाम/मंत्र दिए जाते है, जिनका हमारे सद्ग्रंथो में कोई साक्ष्य नहीं है। कबीर जी की वाणी है कि - सोई गुरु पूरा कहावै, दोय अख्खर का भेद बतावै। कबीर परमेश्वर की ये उपरोक्त वाणी और गीता जी अध्याय 17 के श्लोक 23 के अनुसार तीन बार में नाम दीक्षा देने का प्रमाण है। इससे सिद्ध होता है की इस पंथ के पास यथार्थ शास्त्रानुसार ज्ञान नहीं है। राधास्वामी पंथ की पुस्तक संतमत प्रकाश के पहले भाग पृष्ठ 17 पर लिखा है कि ‘‘वह सतलोक है, उसी को सतनाम कहा जाता है। इनको सतनाम व् सतलोक का भी कोई ज्ञान नही है की यह क्या चीज़ है।
  • #राधास्वामीपंथकीसच्चाई #saintrampalji #radhasoamiji #rssb #radhasoami #moksha #bhakti #satnam #satsang #hookah #bhajan #sewa #gurbani #parshad #gurugranthsahib #waheguruji #waheguru #राधास्वामीपंथ_का_खुलासा श्री शिव दयाल सिंह जी (1861 - 1878) राधास्वामी मत की शिक्षाओं को प्रारंभ करने वाले पहले गुरु थे। लेकिन इन्होने कोई गुरु धारण नहीं किआ था। जबकि शास्त्रों में साफ वर्णित है की बिना सतगुरु बनाये किसी की भक्ति सफल नहीं हो सकती। कबीर जी की वाणी है "कबीर, गुरू बिन ज्ञान ना उपजै, गुरू बिन मिले ना मोक्ष। गुरू बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष।।" "कबीर, गुरु की आज्ञा आवहि, गुरु की आज्ञा जाय। कहे कबीर सो संत है आवागमन नशाये।।" पूर्ण सतगुरु ना मिलने से राधास्वामी पंथ प्रवर्तक शिवदयाल जी ने मनमानी साधना की, राधास्वामी पंथ की पुस्तक-जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज में लिखा है कि श्री शिवदयाल जी ने 17 वर्ष तक बन्द कमरें में हठ योग किया। 5 वर्ष की आयु से शब्द योग के अभ्यास किआ। जबकी गीता अध्याय 3, श्लोक 6 से 9 तक हठयोग निषेध बताया है। सिद्ध होता है कि शिवदयाल जी शास्त्रविरूद्ध साधना करते थे, उन्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं था। गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार जो भी व्यक्ति शास्त्रविधि को त्याग कर मनमाना आचरण करता है उस प्राणी की कभी गती नहीं हो सकती। जिसके परिणाम वश राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत भूत योनी को प्राप्त हुए, वे अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके पितरों व भूतों की तरह बोल कर आदेश देते थे अर्थात बुक्की जी के मुख से हुक्का पीते थे तथा उसके अन्तिम स्वांस तक प्रवेश रहे। सोचीये जिस पंथ का प्रर्वतक ही भूत योनी को प्राप्त हुआ हो, और हुक्का पिता हो, तो उनके अनुयाइयों का क्या बनेगा? कबीर साहेब जी की वाणी है। सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार। एक चिलम हुक्का भरै, वह डूबै काली धार।।” राधास्वामी पंथ में काल के 5 नाम/मंत्र दिए जाते है, जिनका हमारे सद्ग्रंथो में कोई साक्ष्य नहीं है। कबीर जी की वाणी है कि - सोई गुरु पूरा कहावै, दोय अख्खर का भेद बतावै। कबीर परमेश्वर की ये उपरोक्त वाणी और गीता जी अध्याय 17 के श्लोक 23 के अनुसार तीन बार में नाम दीक्षा देने का प्रमाण है। इससे सिद्ध होता है की इस पंथ के पास यथार्थ शास्त्रानुसार ज्ञान नहीं है। राधास्वामी पंथ की पुस्तक संतमत प्रकाश के पहले भाग पृष्ठ 17 पर लिखा है कि ‘‘वह सतलोक है, उसी को सतनाम कहा जाता है। इनको सतनाम व् सतलोक का भी कोई ज्ञान नही है की यह क्या चीज़ है।
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  • mahurgeeta - Geeta Mahur @mahurgeeta 3 hours ago
  • #राधास्वामीपंथकीसच्चाई
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#राधास्वामीपंथ_का_खुलासा 
संत का काम होता है कुरीतियों को खत्म करना भांग तमाखू मांस न खाना शराब न पीना
जबकि राधा स्वामी पंथ वाले कहते हैं की सख्त जरूरत पड़ने पर शराब मांस का सेवन कर सकते हैं
और शिवदयाल जी तो खुद ही हुक्का पीते थे 
क्या ये संत के लक्षण हो सकते हैं कबीर साहेब कहते हैं
भांग तमाखू छूतरा आफू और सराब 
कहे कबीर कैसे करे बंदगी ये तो करे खराब

राधास्वामी पंथ बालों को नहीं है पूर्ण परमात्मा की वास्तविक जानकारी 
राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी के कोई गुरु नहीं थे
प्रमाण - पुस्तक जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज के पृष्ठ नंबर 27 पर लिखा है कि शिव दयाल जी का कोई गुरु नहीं था
विचार कीजिए बिना गुरु के मोक्ष कैसे संभव हो सकता है

कबीर_ गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान गुरु विन दोनों निष्फल है चाहे पूछो वेद पुराण

कबीर साहिब की वाणी से स्पष्ट है कि बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं है

शिवदयाल जी नहीं थे सतगुरु

गुरुनानक जी ने अपनी वाणी में खुद कहा है
"सोई गुरु पूरा कहावे जो दो अख्कर का भेद बताये।
एक छुड़ावै एक लखावै तो प्राणी निज घर को जावे।"
और राधास्वामी पंथ में पाँच नाम दिए जाते हैं।
और  तो और 
राधास्वामी पंथ वाले कहते हैं कि परमात्मा निराकार है और सतलोक में आत्मा निराकार परमात्मा में ऐसे लीन हो जाती है जैसे बूंद समुद्र में विचार करे कोई समुद्र में डूब कर मर सकता है
 और रही बात भगवान निराकार की जबकि 
वेदों में स्पष्ट लिखा है की पूर्ण परमात्मा साकार है नर आकार है शय शरीर है उसका नाम कबीर है
इससे स्पष्ट होता है कि राधास्वामी पंथ वाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं और इन्हें वेदों का कुछ भी ज्ञान नहीं है
जाने राधा स्वामी पंथ की सच्चाई साधना टीवी पर शाम 7:30 से #राधास्वामीपंथकीसच्चाई #saintrampalji #radhasoamiji #rssb #radhasoami #moksha #bhakti #satnam #satsang #hookah #bhajan #sewa #gurbani #parshad #gurugranthsahib #waheguruji #waheguru #राधास्वामीपंथ_का_खुलासा संत का काम होता है कुरीतियों को खत्म करना भांग तमाखू मांस न खाना शराब न पीना जबकि राधा स्वामी पंथ वाले कहते हैं की सख्त जरूरत पड़ने पर शराब मांस का सेवन कर सकते हैं और शिवदयाल जी तो खुद ही हुक्का पीते थे क्या ये संत के लक्षण हो सकते हैं कबीर साहेब कहते हैं भांग तमाखू छूतरा आफू और सराब कहे कबीर कैसे करे बंदगी ये तो करे खराब राधास्वामी पंथ बालों को नहीं है पूर्ण परमात्मा की वास्तविक जानकारी राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक शिवदयाल जी के कोई गुरु नहीं थे प्रमाण - पुस्तक जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज के पृष्ठ नंबर 27 पर लिखा है कि शिव दयाल जी का कोई गुरु नहीं था विचार कीजिए बिना गुरु के मोक्ष कैसे संभव हो सकता है कबीर_ गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान गुरु विन दोनों निष्फल है चाहे पूछो वेद पुराण कबीर साहिब की वाणी से स्पष्ट है कि बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं है शिवदयाल जी नहीं थे सतगुरु गुरुनानक जी ने अपनी वाणी में खुद कहा है "सोई गुरु पूरा कहावे जो दो अख्कर का भेद बताये। एक छुड़ावै एक लखावै तो प्राणी निज घर को जावे।" और राधास्वामी पंथ में पाँच नाम दिए जाते हैं। और तो और राधास्वामी पंथ वाले कहते हैं कि परमात्मा निराकार है और सतलोक में आत्मा निराकार परमात्मा में ऐसे लीन हो जाती है जैसे बूंद समुद्र में विचार करे कोई समुद्र में डूब कर मर सकता है और रही बात भगवान निराकार की जबकि वेदों में स्पष्ट लिखा है की पूर्ण परमात्मा साकार है नर आकार है शय शरीर है उसका नाम कबीर है इससे स्पष्ट होता है कि राधास्वामी पंथ वाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं और इन्हें वेदों का कुछ भी ज्ञान नहीं है जाने राधा स्वामी पंथ की सच्चाई साधना टीवी पर शाम 7:30 से
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